मृत्यु एवं श्राद्ध

तेरहवीं संस्कार

Tehravi Sanskar

पूजा का महत्व एवं विवरण (Overview)

मृत्यु के पश्चात होने वाले संस्कारों में तेरहवीं अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। इसमें दिवंगत आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ, शुद्धि हवन, ब्राह्मण भोजन, और महादान (सजा शय्या दान) किया जाता है। इसके पश्चात ही परिवार के मांगलिक कार्यों का निषेध (सूतक) समाप्त होता है।

तेरहवीं संस्कार के मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • दिवंगत आत्मा को यमलोक की यात्रा से मुक्ति और शांति मिलती है।
  • परिवार की अशुद्धि (सूतक काल) समाप्त होती है और शुद्धि होती है।
  • ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य से दिवंगत आत्मा को सद्गति मिलती है।

मुख्य पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)

* यह एक सामान्य सूची है। तिथि एवं यजमान की सुविधानुसार सामग्री में परिवर्तन किया जा सकता है।

ब्राह्मणों के लिए शय्या दान सामग्री (वस्त्र, छाता, जूता, पात्र आदि)
हवन सामग्री, आम की लकड़ी, पंचामृत
सफेद तिल, कुशा, गंगाजल, चंदन, रोली, अक्षत
ब्राह्मण भोजन की पूर्ण सामग्री, फल, मिठाई
अनुमानित अवधि4 घंटे
सेवा स्थानवाराणसी, लखनऊ एवं निकटवर्ती क्षेत्र (या ऑनलाइन संकल्प)
वाराणसी वैदिक मंडल संबद्ध