मृत्यु एवं श्राद्ध
पिंडदान एवं श्राद्ध क्रिया
Pind Daan & Shraddhaपूजा का महत्व एवं विवरण (Overview)
पिंडदान सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनकी मुक्ति का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। इसे मुख्य रूप से गया जी, वाराणसी (काशी) या किसी पवित्र नदी के तट पर किया जाता है। जौ के आटे और तिल से बने पिंडों को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पितरों को समर्पित किया जाता है, जिससे वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं।
पिंडदान एवं श्राद्ध क्रिया के मुख्य लाभ (Key Benefits)
- ✓पितरों की आत्मा को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- ✓कुंडली के पितृ दोष का पूर्ण शमन होता है, जिससे वंश वृद्धि होती है।
- ✓परिवार पर पितरों का मंगल आशीर्वाद और कृपा सदा बनी रहती है।
मुख्य पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)
* यह एक सामान्य सूची है। तिथि एवं यजमान की सुविधानुसार सामग्री में परिवर्तन किया जा सकता है।
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जौ का आटा, काले तिल, कुशा घास (आसन व मुद्रिका के लिए)✓
गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी, चीनी✓
सफेद जनेऊ, सफेद वस्त्र, रोली, चावल, चंदन✓
पिंडदान के पात्र, धूप-दीप, फल, फूलअनुमानित अवधि2-3 घंटे
सेवा स्थानवाराणसी, लखनऊ एवं निकटवर्ती क्षेत्र (या ऑनलाइन संकल्प)
वाराणसी वैदिक मंडल संबद्ध