वैदिक संस्कार
नामकरण संस्कार
Namkaran Sanskarपूजा का महत्व एवं विवरण (Overview)
नामकरण संस्कार शिशु के जन्म के बाद किया जाने वाला पहला सामाजिक-धार्मिक संस्कार है। यह आमतौर पर शिशु के जन्म के ११वें या १२वें दिन किया जाता है। इस दिन नक्षत्रों की गणना के अनुसार शिशु का नाम तय किया जाता है और उसके दीर्घायु व बुद्धिमान होने की कामना की जाती है।
नामकरण संस्कार के मुख्य लाभ (Key Benefits)
- ✓शिशु के ग्रह दोषों का निवारण होता है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
- ✓सकारात्मक नामकरण से शिशु के व्यक्तित्व का सुंदर विकास होता है।
- ✓नवजात को कुलदेवताओं और गुरुजनों का आशीर्वाद मिलता है।
मुख्य पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)
* यह एक सामान्य सूची है। तिथि एवं यजमान की सुविधानुसार सामग्री में परिवर्तन किया जा सकता है।
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नया वस्त्र शिशु के लिए, कलश, पंचरत्न✓
शहद, सोने की सलाई या अंगूठी (मधुपर्क के लिए)✓
कुमकुम, अक्षत, हल्दी, फूल, फल, मिठाई✓
हवन सामग्री, घीअनुमानित अवधि2 घंटे
सेवा स्थानवाराणसी, लखनऊ एवं निकटवर्ती क्षेत्र (या ऑनलाइन संकल्प)
वाराणसी वैदिक मंडल संबद्ध