वैदिक संस्कार
जनेऊ (यज्ञोपवीत) संस्कार
Upanayan / Janeu Sanskarपूजा का महत्व एवं विवरण (Overview)
यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार बालक के जीवन का एक नया जन्म माना जाता है, जिसे 'द्विज' भी कहते हैं। इसमें बालक को गुरु दीक्षा दी जाती है और वह गायत्री मंत्र का जप करने का अधिकारी बनता है। यह संस्कार पवित्रता, कर्तव्यनिष्ठा और विद्या प्राप्ति के लिए अनिवार्य माना गया है।
जनेऊ (यज्ञोपवीत) संस्कार के मुख्य लाभ (Key Benefits)
- ✓बालक का आध्यात्मिक और बौद्धिक जागरण होता है।
- ✓जीवन में अनुशासन, संयम और सदाचार के नियमों का विकास होता है।
- ✓गायत्री मंत्र की दीक्षा के साथ ज्ञान के मार्ग पर प्रवेश होता है।
मुख्य पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)
* यह एक सामान्य सूची है। तिथि एवं यजमान की सुविधानुसार सामग्री में परिवर्तन किया जा सकता है।
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तीन धागों वाला पवित्र यज्ञोपवीत✓
मूंज की मेखला, पलाश का दंड, मृगचर्म या पीला वस्त्र✓
हवन सामग्री, घी, समिधा, लंगोट✓
भिक्षा के लिए चावल और फलअनुमानित अवधि3-4 घंटे
सेवा स्थानवाराणसी, लखनऊ एवं निकटवर्ती क्षेत्र (या ऑनलाइन संकल्प)
वाराणसी वैदिक मंडल संबद्ध